शनिवार, 27 अप्रैल 2013

दिल की हर धड़कन में तुम हो

दिल की हर धड़कन में तुम हो ,
मन के हर मंजर में तुम हो ,
सुब्हे - शामे ,प्रातः -काले ,
ख्वाबों  में ,हर पल में तुम हो।
इस तरह मुझमें  समयीं ,
तो  मेरा अपराध क्या है ,
ये  नहीं तो तुम ही बोलो ,
फिर  कहो तुम प्यार क्या है।।


तुम मेरे हर काव्य  में  हो,
महफिलों  के  राग में हो,
हार में  हो , जीत में  हो,
प्रेम  के  हर गीत में हो।

जिस तरह  मोहन की  राधा ,
उस तरह की  प्रीति  में हो ,
तुम मेरे हर गीत में हो,
दिल की हर धड़कन में तुम हो।।
 

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